"ब्राह्मण" क्या है???
जब ब्राह्मण शब्द आपके सामने उच्चारित हो तो कृपया इसका अर्थ सिर्फ एक जाति विशेष को संबोधित करने वाले शब्द के रूप में ना लगाएं।इसके कई अर्थ हैं।पाणिनि ने सर्वप्रथम संस्कृत व्याकरण की किताब लिखी। उसमे उन्होंने लिखा की पिता के नाम में 'आ' की मात्रा लगाओ तो बेटे का नाम और 'आ' के साथ साथ अंत में 'ई' की मात्रा भी लगा दो तो बेटी का नाम हो जाता है। इसी आधार पर वसुदेव के पुत्र वासुदेव हुए और जनक की पुत्री जानकी।ब्रह्मा को वेदों में ब्रह्मन उच्चारित किया गया । ब्रह्मन के पुत्र ब्राह्मन अर्थात ब्राह्मण । चूँकि ब्रह्मा जी ने सबको बनाया तो हर व्यक्ति ब्राह्मण है।ब्राह्मण का दूसरा अर्थ होता है एक धार्मिक पुस्तक, जब इसे नपुंसक लिंग में प्रयोग किया जाय। वेदचार भागों में बांटे हुये हैं। वेदों के दूसरे हिस्से को ब्राह्मण कहा जाता है। हरेक वेद के ब्राह्मण पुस्तक हैं। उदाहरणके लिए, ऋग्वेद के दो ब्राह्मण हैं: एतरेय ब्राह्मण औरसंख्यान ब्राह्मण।ब्राह्मण का अगला अर्थ है ब्रह्म को जानने वाला।ब्राह्मण शब्द का अर्थ जो सबसे ज्यादा प्रचलित है वो है की ब्राह्मण हिन्दू धर्म में प्रचलित चार वर्णों में से एक है जिसका उल्लेख पुरुषसूक्त में किया गया है।अन्य अर्थो में पुजारी, विद्वान् आदि हैं।अतः अब से आप ये समझे की कोई व्यक्ति ब्राह्मण हो भी सकता है और नहीं भी, ये इस बात पर निर्भर करता है की आप किस सन्दर्भ में बात कर रहे हैं। और रही बात वर्ण वयस्था की तो उसका सीधा उदाहर है जब से आर्य एक समाज बन गया जब से अर्यो ने हमारे राम कृष्ण को भगवान् मानने से इंकार कर दिया वैसे ही हमारे सनातन को विघटन करने के लिए वर्ण वयवस्था और हिन्दू शब्द दे दिया गया। भगवान् करे की आप अर्यो से दूर रहे।।
अगर पत्थर पूजने में किसी को लाज आती है तो हम सनातनी को पत्थर पूजने में घमंड है। जिस पत्थर के बारे में हनुमान जी समझ गए हमें उस पत्थर में नाज है। जिसे मीरा ने प्रेम का रस समझ कर पूजा और आपके अर्यो ने हमारे गोपाल को रसिया नाम दिया हमें उस रसिक मोहन में गर्व है क्यू की वो हमारे प्रभु गीता का ज्ञान देने वाले परमात्मा है। जो आर्य हमारे भोले को अद्भंगी कहते है गजेडी कहते है हमें उस नीलकंठ पे घमंड है। जो आर्य हमारे पुरषों में उत्तम पुरषोत्तम राम को इन्सान कहते है हमें उस संतो के संत दसरथ के ज्येष्ठ पुत्र प्रभु श्री राम पे अहंकार है। जय बाबा गणेश माता संग भोले मुरारी राम ।
gangamanidixit मनुष्य को अपने क्रोध पर नियंत्रण रखना बहुत आवश्यक हैं क्योंकि क्रोध से भ्रम पैदा होता है, भ्रम से बुद्धि का नाश होता हैं जब बुद्धि का नाश हो जाता है तो मनुष्य का सर्वनाश हो जाता है ।
रविवार, 5 अप्रैल 2015
ब्राह्मण क्या है
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