शनिवार, 26 सितंबर 2015

26 सितम्बर का इतिहास

सूबेदार जोगिन्दर सिंह का जन्म 26 सितम्बर 1921 – शहादत: 23 अक्तूबर 1962 को हुआ।परमवीर चक्र से सम्मानित भारतीय सैनिक थे। इन्हें यह सम्मान सन 1962 में मरणोपरांत मिला। स्वतंत्र भारत ने चीन से बस एक युद्ध 1962 में लड़ा जिसने उसे बहुत सारे अनुभव दिए। ये अनुभव फौजी हकीकत से तो जुड़े हुए थे ही इनमें राजनैतिक तौर पर भी बहुत कुछ आँख खोल देने वाला था। इस युद्ध में चीन के साथ लड़ते हुए भारत के चार पराक्रमी योद्धाओं ने परमवीर चक्र प्राप्त किए। इन चारों में से तीन को तो यह यश मरणोपरान्त मिला और केवल एक वीर सारी कथा को बताने के लिए जीवित बचा रहा। उन तीनों योद्धाओं में जो रणभूमि में वीरगति को प्राप्त हुए, एक सूबेदार जोगिन्दर सिंह भी थे जो 1 सिख रेजिमेंट के सेनानी थे और टोंगपेन ला, नेफा में बूमला मोर्चे पर लड़ रहे थे।
यह फौज गिनती में पूरे एक डिवीजन भर थी जब कि उसके सामने भारत की केवल 1 सिख कम्पनी थी। इस कम्पनी की अगुवाई सूबेदार जोगिन्दर सिंह कर रहे थे। 20 अक्तूबर 1962 का दिन था। सूबेदार जोगिन्दर सिंह रिज के पास नेफा में टोंग पेन में अपनी टुकड़ी के साथ तैनात थे। सुबह साढ़े पाँच बजे चीन की फौजों ने बूमला पर जबरदस्त धावा बोला। उनका इरादा टोवांग तक पहुँच जाने का था। दुश्मन की फौज ने तीन दौरों में उन मोर्चे पर हमला किया। हर बार सैनिकों की संख्या 200 थी। पहला हमला सूबेदार की फौजें बहादुरी से झेल गई जिसमें चीन को कोई कामयाबी नहीं मिली। उसका भारी नुकसान भी हुआ। और उसे थम जाना पड़ा। कुछ ही देर बाद दुश्मन ने फिर धावा बोला। उसका भी सामना जोगिन्दर सिंह ने बहादुरी से किया। 'जो बोले सो निहाल...' का नारा लगाते और दुश्मन का हौसले पस्त कर देते। लेकिन दूसरा हमला जोगिन्दर सिंह की आधी फौज साफ कर गया। सूबेदार जोगिन्दर सिंह खुद भी घायल थे। उनकी जाँघ में गोली लगी थी फिर भी वह जिद में थे कि रण नहीं छोड़ेंगे। उनके नेतृत्व में उनकी फौज भी पूरे हौसले के साथ जमी हुई थी, हालाँकि उसमें भी सैनिक घायल हो चुके थे। तभी दुश्मन की ओर से तीसरा हमला किया गया। अब तो सूबेदार जोगिन्दर सिंह ने खुद हाथ में मशीनगन लेकर गोलियाँ दागनी शुरू कर दीं थीं। चीन की फौज का भी इस हमले में काफ़ी नुकसान हो चुका था, लेकिन वह लगातार बढ़ते जा रहे थे फिर स्थिति यह आई कि सूबेदार की फौज के पास गोलियों का भण्डार खत्म हो गया। अब बारी थी संगीन को खंजर की तरफ इस्तेमाल करके दुश्मन का काम तमाम करने की।
सूबेदार और उनके साथी इस मुठभेड़ में भी बिना हिम्मत हारे पूरे जोश के साथ जूझते रहे और आगे बढ़ती चीन की फौजों को चुनौती देते रहे। आखिर वह और उनके बचे हुए सैनिक दुश्मन के कब्जे में आ गए। यह सच था कि वह मोर्चा भारत जीत नहीं पाया लेकिन उस मोर्चे पर सूबेदार जोगिन्दर सिंह ने जो बहादुरी आखिरी पल तक दिखाई, उसके लिए उनको सलाम। सूबेदार जोगिन्दार सिंह दुश्मन की गिरफ्त में आ गए, उसके बाद उनका कुछ पता नहीं चला। चीनी फौजों ने न तो उनका शव भारत को सौंपा, न ही उनकी कोई खबर दी। इस तरह उनकी शहादत अमर हो गई।

अब आइये एक नजर में देखते है आज के इतिहास के बारे में। और प्रेम से बोलिये जय बाबा फरसा वाले की।

विश्व मूक बधिर दिवस (World Deaf-Dumb Day) हर वर्ष 26 सितम्बर को मनाया जाता है, लेकिन वर्तमान में यह विश्व मूक बधिर सप्ताह के रूप में अधिक जाना जाता है। यह सितम्बर के अंतिम सप्ताह में मनाया जाता है। विश्व बधिर संघ (डब्ल्यूएफडी) ने वर्ष 1958 से 'विश्व बधिर दिवस' की शुरुआत की। इस दिन बधिरों के सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक अधिकारों के प्रति लोगों में जागरूकता उत्पन्न करने के साथ-साथ समाज और देश में उनकी उपयोगिता के बारे में भी बताया जाता है।

1087: विलियम द्वितीय इंग्लैड के सम्राट बने.

1820: भारतीय समाज सुधारक, शिक्षाविद् और स्वतंत्रता सेनानी ईश्वर चन्द्र विद्यासागर का जन्म हुआ.

1973: सुपरसैनिक कॉन्कॉर्ड यात्री हवाई जहाज ने अटलांटिक की यात्रा को रिकॉर्ड समय में यानी महज 3 घंटा 32 मिनट में पूरा किया.

1986: ब्रिटेन और चीन के बीच हांगकांग को लेकर समझौता हुआ.

1960: राष्ट्रपति पद के लिए जॉन एफ केनेडी और रिचर्ड निक्सन के बीच हुई बहस को पहली बार सात करोड़ लोगों ने टीवी पर देखा.

2004: अमेरिका ने असैनिक अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए भारत को तकनीक देने का निर्णय किया.

2007: वियतनाम के दक्षिणी श्‍हर कैनथो में एक निर्माणाधीन पुल के ध्‍वस्त हो जाने से 62 श्रमिकों की मृत्‍यु हो गई.

अविभाजित पंजाब के गुरदासपुर जिले के जाने माने वकील पिछौरीमल आनंद के घर 26 सितम्बर सन 1923 को एक बालक का जन्म हुआ। मां-बाप ने नाम रखा धर्मदेव पिछौरीमल आनंद। वही बालक जो आने वाले समय में देव आनंद के नाम से हिंदी सिने जगत के आकाश में स्टाइल गुरु बनकर जगमगाया।

मनमोहन सिंह जी का जन्म : 26 सितंबर 1932) को हुआ ,भारत गणराज्य के 13वें प्रधानमन्त्री थे। साथ ही साथ वे एक अर्थशास्त्री भी हैं। लोकसभा चुनाव 2009 में मिली जीत के बाद वे जवाहरलाल नेहरू के बाद भारत के पहले ऐसे प्रधानमन्त्री बन गये हैं, जिनको पाँच वर्षों का कार्यकाल सफलता पूर्वक पूरा करने के बाद लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने का अवसर मिला है। इन्हें 21 जून 1991 से 16 मई 1996 तक पी वी नरसिंह राव के प्रधानमंत्रित्व काल में वित्त मन्त्री के रूप में किए गए आर्थिक सुधारों के लिए भी श्रेय दिया जाता है।

26 सितंबर 2013 को जम्मू-कश्मीर के हीरानगर के पुलिस स्टेशन व सांबा में सैनिक छावनी पर बंदूकधारी आतंकवादियों ने हमला कर दिया।
आतंकी संगठन 'शोहादा ब्रिगेड' ने इन आतंकी हमलों की जिम्मेदारी ली। इसके तीनों आतंकवादी मारे गए।और इस हमले में एक लैफ्टिनेण्ट कर्नल सहित 12 की मृत्यु हुई।

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