रविवार, 23 अगस्त 2015

23 अगस्त का इतिहास

1914 - जापान द्वारा जर्मनी के विरुद्ध युद्ध की घोषणा।
1993 - सन् 2000 के ऐतिहासिक ओलंपिक खेलों की मेजबानी आस्ट्रेलियाई नगर सिडनी को सौंपी गई।
1997 - सं.रा. अमेरिका के मिसीसिपी यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर को चार साल पहले मिला हल्दी का पेटेन्ट रद्द।
1999 - इस्रायल और फ़िलिस्तीन के बीच मान्यता सम्बन्धी मुद्दों पर वार्ता पुन: प्रारम्भ।
2002 - संयुक्त राज्य अमरीका ने मिसाइल रक्षा प्रणाली का परीक्षण रोका, इटली ने पाकिस्तान में वाणिज्य दूतावास बन्द करने की धमकी दी।
2003 - ब्राजील में एक अंतरिक्ष यान में प्रक्षेपण से पूर्व ही विस्फोट हो जाने से कम से कम 21 लोग मारे गये, पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ़ ने घोषित किया कि पाकिस्तान न्यूनतम सुरक्षात्मक हथियार क़ायम रखेगा।
2004 - अमेरिका के जस्टिन गैटलिन 100 मीटर फर्राटा दौड़ जीतकर पृथ्वी के सबसे तेज धावक बने। चिली के निकोलस मासु ने अमेरिका के मार्डी फ़िश को हराकर ओलम्पिक पुरुष एकल टेनिस का स्वर्ण पदक जीत लिया।
2007 - यूनेस्को के विश्व स्मृति रजिस्टर-2007 में ऋग्वेद की 30 पांडुलिपियाँ शामिल की गईं। पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय ने निर्वासित जीवन व्यतीत कर रहे पाकिस्तान के पूर्व मुख्यमंत्री नवाज शरीफ़ को स्वदेश वापसी की अनुमति दी।
2008-
झारखण्ड के मुख्यमंत्री मधुकोड़ा ने अपने पद से इस्तीफा दिया।
उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश महिला आयोग में 16 सदस्यों को नामित किया।
आइये जान लेते कौन कौन महानुभावो ने इस भारत माँ की धरती पे जन्म लिए।23 अगस्त को जन्मे व्यक्ति

1872- टी. प्रकाशम, प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और आंध्रा राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री
1923- बलराम जाखड़, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष
1944- सायरा बानो, प्रसिद्ध फ़िल्म अभिनेत्री।

23 अगस्त को हुए निधन।

1975- विनायकराव पटवर्धन- प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीत गायक।
पाकिस्तान के वसीम रजा का 23 अगस्त, 2006 को इंग्लैंड के मर्लो में मैच के दौरान दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया.

और आज का सबसे महत्व्पूर्ण इतिहास जो बन्ने जा रहा है।
निया की सबसे छोटी रेल मानी जाने वाली नैरोगेज ट्रेन का रोमांचक सफर अब बंद होने जा रहा है. मध्यप्रदेश के ग्वालियर से सबलगढ़ के बीच चलने वाली इस ट्रेन को 23 अगस्त से बंद किया जा रहा है.
रेलवे ने नैरोगेज को बंद करने का कारण ट्रेन में नए कोचों का ना होना बताया है. रेलवे अफसरों का कहना है कि नए कोच आने पर फिर से ट्रेन को शुरू किया जाएगा. जबकि बताया जाता है कि वर्ष 2003 में यह ट्रेन उत्तर मध्य रेलवे के अंतर्गत संचालित की जाने लगी, लेकिन इसके अधिकतर डिब्बे वर्ष 1988 से 1992 के बीच तैयार किए गए थे.
रेलवे के इस निर्णय से हर रोज इस ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों में इस फैसले से भारी आक्रोश है. ग्वालियर से सबलगढ़ के बीच चलने वाली पैसेन्जर ग्रामीण इलाकों की लाइफ लाइन कही जाती है. जिसे ग्वालियर के सिधिंया परिवार के समय शुरू किया गया था. इस फैसले के खिलाफ कांग्रेस अब आंदोलन की तैयारी कर रही है.
नैरोगेज रेलवे लाइन का इतिहास यह विश्व में नैरोगेज की सबसे लंबी और संकरी रेलवे लाइन है. 610 मिमी (लगभग दो फीट) चौड़ी यह लाइन लगभग 200 किमी तक बिछाई गई है. रिकॉर्ड के मुताबिक वर्ष 1942 में इसे सिंधिया स्टेट के अंतर्गत संचालित किया जाता था. आजादी के बाद बाद इसे भारतीय रेलवे ने अपने अधिकार में ले लिया था. वर्ष 1951 में ग्वालियर स्टेशन मध्य रेलवे के अंतर्गत चलाया गया था.
इन जगहों पर चलती है नैरोगेज ग्वालियर के अलावा मध्यप्रदेश के मंडला से नैनपुर होकर जबलपुर और बालाघाट में भी इन ट्रेनों को चलाया जा रहा है. इसके अलावा देश में सिर्फ कालका-शिमला, दार्जिलिंग और पठानकोट से जोगेन्दर नगर के लिए नैरोगेज ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है.
इसलिए चर्चा में रहती थी नैरोगेज
संकरी पटरी पर दौड़ने वाली नैरागेज ट्रेन अक्सर चर्चा में बनी रहती थी. इसका कारण है कि कभी ट्रेन को धक्का देकर आगे बढ़ाया जाता था, तो कभी ट्रेन के इंजन और छतों पर सवार होकर लोग यात्रा करते थे. यहां तक कि ट्रेन ड्रायवर को भी इंजन पर सवार भीड़ के कारण यह रेले रोकनी पड़ी थी क्योंकि उसे सामने रूट दिखना ही बंद हो गया था।

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