सोमवार, 24 अगस्त 2015

24 अगस्त का इतिहास

प्रेम से बोलिये जय बाबा भोले नाथ।
अब एक नजर आज के इतिहास पे डालते है।
🚩1600 इस्‍ट इंडिया कंपनी का पहला जहाज, हेक्‍टर, सूरत के तट पर पहुंचा

1690 कलकत्‍ता शहर का स्‍थापना दिवस

1925 समाजसुधारक रामक़ष्‍ण गोपाल भंडारकर का निध्‍ान

1969 वीवी गिरी भारत के चौथे राष्‍ट्रपति बने

1974 फखरूदीन अली अहमद भारत के पांचवें राष्‍ट्रपति बने

1991 यूक्रेन सोवियत संध से अलग होकर स्‍वतंत्र देश बना

2008 पेइचिंग ओलपिक का समापन इसमें चीन 51 स्‍वर्ण पदकों के साथ शीर्ष पर रहा।
और आज सबसे महत्व्पूर्ण दिन क्यू है आइये जानते है।

"शहीदों की चिताओं पर, लगेंगे हर बरस मेले,
वतन पर मरने वालों का, यही नामों-निशां होगा"

शहीद राजगुरु का पूरा नाम 'शिवराम हरि राजगुरु' था। राजगुरु का जन्म 24 अगस्त, 1908 को पुणे ज़िले के खेड़ा गाँव में हुआ था, फ़िलहाल में आज उसी गाव के जिले में रहता हूँ और अपने आप को बहुत ही भाग्यवान समझता हूँ। जिसका नाम अब 'राजगुरु नगर' हो गया है। उनके पिता का नाम 'श्री हरि नारायण' और माता का नाम 'पार्वती बाई' था। भगत सिंह और सुखदेव के साथ ही राजगुरु को भी 23 मार्च 1931 को फांसी दी गई थी|
आज़ादी का प्रण-------

राजगुरु `स्वराज मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है और मैं उसे हासिल करके रहूंगा' का उद्घोष करने वाले लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के विचारों से बहुत प्रभावित थे। 1919 में जलियांवाला बाग़ में जनरल डायर के नेतृत्व में किये गये भीषण नरसंहार ने राजगुरु को ब्रिटिश साम्राज्य के ख़िलाफ़ बाग़ी और निर्भीक बना दिया तथा उन्होंने उसी समय भारत को विदेशियों के हाथों आज़ाद कराने की प्रतिज्ञा ली और प्रण किया कि चाहे इस कार्य में उनकी जान ही क्यों न चली जाये वह पीछे नहीं हटेंगे।

जीवन के प्रारम्भिक दिनों से ही राजगुरु का रुझान क्रांतिकारी गतिविधियों की तरफ होने लगा था। राजगुरु ने 19 दिसंबर, 1928 को शहीद-ए-आजम भगत सिंह के साथ मिलकर लाहौर में सहायक पुलिस अधीक्षक पद पर नियुक्त अंग्रेज़ अधिकारी 'जे. पी. सांडर्स' को गोली मार दी थी और ख़ुद को अंग्रेज़ी सिपाहियों से गिरफ़्तार कराया था। यह सब पूर्व नियोजित था।

अदालत में इन क्रांतिकारियों ने स्वीकार किया था कि वे पंजाब में आज़ादी की लड़ाई के एक बड़े नायक लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेना चाहते थे। अंग्रेज़ों के विरुद्ध एक प्रदर्शन में पुलिस की बर्बर पिटाई से लाला लाजपत राय की मृत्यु हो गई थी।
प्रसिद्ध तिकड़ी के रूप में भी एक थे (भगतसिंह, सुखदेव, राजगुरु )
राजगुरु ने भगत सिंह के साथ मिलकर सांडर्स को गोली मारी थी,राजगुरु ने 28 सितंबर, 1929 को एक गवर्नर को मारने की कोशिश की थी जिसके अगले दिन उन्हें पुणे से गिरफ़्तार कर लिया गया था।राजगुरु पर 'लाहौर षड़यंत्र' मामले में शामिल होने का मुक़दमा भी चलाया गया।
फ़ाँसी का दिन------सुखदेव,भगतसिंह,राजगुरु
राजगुरु को भी 23 मार्च, 1931 की शाम सात बजे लाहौर के केंद्रीय कारागार में उनके दोस्तों भगत सिंह और सुखदेव के साथ फ़ाँसी पर लटका दिया गया.विशेष----
इतिहासकार बताते हैं कि फाँसी को लेकर जनता में बढ़ते रोष को ध्यान में रखते हुए अंग्रेज़ अधिकारियों ने तीनों क्रांतिकारियों के शवों का अंतिम संस्कार फ़िरोज़पुर ज़िले के हुसैनीवाला में कर दिया था।

अब आते है 👉🚩👈

पारसी समुदाय द्वारा भगवान प्रौफेट जरथुस्त्र का जन्म दिवस 24 अगस्त को मनाया जाता है। पारसियों के लिए यह दिन सबसे बड़ा होता है। जरथुस्त्री (पारसी) धर्म की साक्ष्यों के आधार पर सटिक जानकारी देने में काफी कठिनाई है।
स्वयं धर्म प्रवर्तक जरथुस्त्र के समय के निर्धारण को लेकर मतभेद हैं, फिर भी यह कहा जा सकता है कि सिकंदर से बहुत पूर्व जरथुस्त्री धर्म अपने पूर्ण विकास को प्राप्त हो चुका था, क्योंकि सिकंदर से योरप का इतिहास प्रारंभ होता है। फारस पर सिकंदर के हमले के प्रभाव के कारण जरथुस्त्री धर्म के सारे धर्म ग्रंथ नष्टप्रायः हो गए थे।
कुछ भी हो, पारसी धर्म के मूल प्रवर्तक जरथुस्त्र थे एवं उनके बताए मार्ग को ही जरथुस्त्री धर्म कहा जाता है। स्वयं जरथुस्त्र ने पूर्व प्रचलित सिद्धांतों को नई रूपरेखा देने की ही चेष्टा की थी। जरथुस्त्र का जीवन ऐतिहासिक और व्यक्तित्व अलौकिक था। संसार के महान पुरुषों और धर्म प्रवर्तकों में उनका एक विशिष्ट स्थान है।
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