इतिहास में आज हर तरफ से उत्तर प्रदेश का पलड़ा भरी नजर आता है। आज वीर अब्दुल हमीद की पुण्यतिथि है , इनका जन्म उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के धामूपुर गाँव में 1 जुलाई 1933 में एक साधारण दर्जी परिवार में हुआ था। उनके पिता लांस नायक उस्मान फारुखी भी ग्रेनेडियर में एक जवान थे। वे 27 दिसम्बर 1954 को 4 ग्रेनेडियर में भर्ती हुये। और अपने सेवा काल में सैन्य सेवा मेडल, समर सेवा मेडल और रक्षा मेडल से सम्मान प्राप्त किया था।
कम्पनी क्वार्टर मास्टर हवलदार अब्दुल हमीद भारतीय सेना की 4 ग्रेनेडियर में एक सिपाही थे जिन्होंने 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान खेमकरण सैक्टर के आसल उत्ताड़ में लड़े गए युद्ध में अद्भुत वीरता का प्रदर्शन करते हुए 10 सितम्बर 1965 को वीरगति प्राप्त की जिसके लिए उन्हें मरणोपरान्त भारत का सर्वोच्च सेना पुरस्कार परमवीर चक्र मिला। यह पुरस्कार इस युद्ध, जिसमें वे शहीद हुये, के समाप्त होने के एक सप्ताह से भी पहले 16 सितम्बर 1965 को घोषित हुआ।
मरने से पहले परमवीर अब्दुल हमीद ने मात्र अपनी "गन माउन्टेड जीप" से उस समय अजेय समझे जाने वाले पाकिस्तान के "पैटन टैंकों" को नष्ट किया था।
इतिहास और देश की जनता इन्हें हमेसा याद रखेगी अपनी दिलो और दीमाग में।
जय भारत जय सनातन।
आज का दूसरा सबसे महतुपूर्ण बात ये है की उत्तर प्रदेस के प्रथम मुख्यमंत्री और भारत के प्रसिद्द स्व्तंत्रता संग्राम सेनानी गोविन्द बल्लभ पंत का जन्म हुआ ।
10 सितम्बर वर्ष 1887 को अल्मोड़ा ज़िले के खोत नामक स्थान पर हुआ था।वे अपने साहस और संकल्प में प्रसिद्ध थे। सरदार वल्लभ भाई पटेल के निधन के बाद वे भारत के गृहमंत्री बने। हिन्दी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाने और ज़मीनदारी प्रथा को समाप्त करने में उनका महत्त्ववपूर्ण योगदान था। वर्ष 1957 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया। याद रहे भारत रत्न का सम्मान भी उनके ही गृहमंत्रित्व काल में आरम्भ किया गया। 7 मार्च, 1961 को नई दिल्ली में निधन हुआ।
कुमार रणजीत सिंह जी का जन्म: 10 सितम्बर, 1875 और मृत्यु 2 अप्रॅल, 1933 को हुआ। इनको भारतीय क्रिकेट का जादूगर कहा जाता है और उन्हें भारत का सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट खिलाड़ी भी माना जाता है।
1972: भारत के जाने-माने फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप का जन्म हुआ.
आपने फिल्मो में बहुत देखा होगा बाघ से लड़ाई करते हुए लेकिन हकीकत में अपने देश के एक महान क्रन्तिकारी ने अपने बाजुओ के दम पे एक बाघ को मार डाला। इनका नाम जतींद्र नाथ मुखर्जी है इनका जन्म जैसोर जिले में 7 दिसंबर 1879 को हुआ था। पाँच वर्ष की अल्पायु में ही उनके पिता का देहावसान हो गया। माँ ने बड़ी कठिनाई से उनका लालन-पालन किया। 18 वर्ष की आयु में उन्होंने मैट्रिक पास कर ली और परिवार के जीविकोपार्जन हेतु स्टेनोग्राफी सीखकर कलकत्ता विश्वविद्यालय से जुड़ गए। वह बचपन से हई बड़े बलिष्ठ थे। सत्यकथा है कि 27 वर्ष की आयु में एक बार जंगल से गुजरते हुए उनकी मुठभेड़ एक बाघ (रॉयल बेन्गाल टाइगर) से हो गयी। उन्होंने बाघ को अपने हाथो से मार गिराया था। इस घटना के बाद यतीन्द्रनाथ "बाघा जतीन" नाम से विख्यात हो गए थे। इनकी पुण्यतिथि 10 सितम्बर 1915 को मनाया जाता है।
आइये कुछ और देखते है इतिहास में- सन् 1914- माज़ोरी नामक नदी के समीप जर्मनी और रुस की सेनाओं के बीच युद्ध आरंभ हुआ। यह युद्ध प्रथम विश्व युद्ध में संयुक्त मोर्चे में रुस की सम्मिलित के बाद आरंभ हुआ। माज़ईरी युद्ध में हेडनबर्ग के नेतृत्व में जर्मन सेना ने विजय प्राप्त की। और लगभग 20 हज़ार रुसी सैनिक मारे गये और 45 हज़ार को बंदी बना लिया गय। अंतत: सन् 1917 में रुस में क्रान्ति आने के बाद यह देश प्रथम विश्व युद्ध से बाहर निकल गया।
सन् 1919- प्रथम विश्व युद्ध के विजयी देशों और ऑस्ट्रिया हंग्री शासन के बीच सेंन्ट जर्मन समझौते पर हस्ताक्षए हुए। इस समझौते के आधार पर ऑस्ट्रिया को ऑस्ट्रिया हंग्री और चेकोसलावाकिया में विभाजित कर दिया गया। इसी प्रकार उसका कछु भाग इटली, योगोस्लाविया, सोवियत संघ पोलैन्ड और रोमानिया के दे दिया गया। दूसरी ओर युद्ध के आरंभ में ऑस्ट्रिया की संसद ने इस देश द्वारा जर्मनी का साथ दिए जाने पर सहमति जताई थी किंतु सेंट जर्मन समझौते के आधार पर जर्मनी ऑस्ट्रिया की एकजुटता समाप्त हो गयी।
सन् 1954- अलजीरिया के दक्षिणी पश्चिमी क्षेत्र ओरालियान वील में भीषण भूकम्प आया। जिसके कारण दस हज़ार व्यक्ति मारे गये और हजारों लोग बेघर हो गये।
अब प्रेम से बोलिये जय बाबा फरसा वाले
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