सोमवार, 7 सितंबर 2015

7 सितम्बर का इतिहास

आज इतिहास में सात सितम्बर कई महत्व्पूर्ण कार्यो से सफल और याद किया जाता है ☺ आइये एक झलक में देखते है और प्रेम से जय बाबा भोले नाथ का नाम भी लेते है।☺

1- सन् 1683 में  फ़्रांस के गणितज्ञ और वैज्ञानिक रिओमोर का जन्म हुआ। उन्होंने 20 वर्ष की उम्र में गणित के संबंध में एक पुस्तक प्रकाशित की और 25 वर्ष की आयु में विज्ञान अकादमी में प्रवेश लिया। वे फारेनहाइट के समय में शोधकार्य में लीन थे और तापमान मापक यंत्र बनाने के लिए प्रयासरत थे। सन् 1730 में वे अंतत: अपने इस प्रयास में सफल हुए। सन् 1757में रिओमोर का निधन हुआ।

2- सन् 1812- बोरोडिनो के युद्ध में नेपोलियन ने रूसी सेना को पराजित किया।
3- सन् 1822- ब्राज़ील ने पुर्तगाल के अधिकार से स्वतंत्रता प्राप्त की। आज का दिन ब्राज़ील का राष्ट्रीय दिवस है।
पुर्तगाल ने सन् 1494 ईसवी से ब्राज़ील पर क़बज़ा आरंभ किया।पुर्तग़ाल ने स्थानीय रेडइंडियन्स और अफ़्रीक़ा से लाखों अश्वेतों को ब्राज़ील में खेती में लगाया 19वीं शताब्दी के आरंभ में जब पुर्तगाल पर नेपोलियन बोनापार्ट का अधिकार हुआ तो पुर्तगाली तानाशाह अपने परिवार के साथ ब्राज़ील भाग गये जो पुर्तगाल का उपनिवेश था। बोनापोर्ट की पराजय के बाद पुर्तगाली तानाशाह अपने देश लौट गये। किंतु उनके पुत्र ब्राज़ील में उनके उत्तराधिकारी के रुप में बने रहे। उन्होंने 14 वर्ष के बाद आज के दिन पुर्तगाल से ब्राज़ील की स्वाधीनका की घोषणा की और स्वयं को ब्राज़ील का नरेश घोषित किया, सन् 1889 में ब्राज़ील में लोकतंत्र की स्थापना हुई।

4- सन् 1860- लेडी एलगीन नामक जहाज के लेक मिसीगन में डूब जाने से 400 से अधिक लोगों की मौत हो गई।

5- सन् 1899- चीन में मुक्कोबाजों का एक ऐतिहासिक आंदोलन आरंभ हुआ। यह मुक्केबाज़ चीन की सेना का भाग थे। इन्हें आई हू च्वान या न्यायपूर्ण समनिवत मुक्के कहा जाता था। इन लोगों ने चीन के आंतरिक मामलों में जापान और पश्चिमी देशों के प्रतिदिन बढ़ते हस्तक्षेप के विरुद्ध आंदोलन छेड़ दिया और राजधानी पेइचिंग में पश्चिमी देशों के दूतावासों पर क़ब्ज़ा कर लिया। वे चीन में योरोपीय प्रचारकों के पीछे पड़ गये।

6-सन् 1901- पीकींग विदेशियों के नियंत्रण में। 8 देशों की संयुक्त सेना ने चीन के राजा को बॉक्सर की संधि पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया। बॉक्सर विद्रोह का अंत हुआ।

7- सन् 1921- अमेरिका के न्यू जर्सी में पहली मिस अमरिका सौंदर्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था।

8- सन् 1927- फिलियो टेलर ने पूर्णतः इलेक्ट्राणिक टीवी बनाने में सफलता हासिल की।

9- सन् 1929- फिनलैंड में नाजीजार्वी लेक में कुरो नाम स्टीमर के डूबने से 136 लोगों की मौत हो गई।

10- सन् 1940- द्वितीय विश्वयुद्ध में जर्मन सेना ने ब्रिटेन से लड़ाइ की अपनी रणनीति परिवर्तित की और लंदन सहित ब्रिटेन के विभिन्न शहरों पर बमबारी आरंभ कर दी।

11- सन् 1953 - निखिता खुर्स्चियो सोवियत संघ की कम्युनिस्ट पार्टी की सचीव चुनी गईं।

12-सन् 1979- स्कॉट रसमिसल और उनके पिता ब्यू रस्मिसन द्वारा स्थापित खेल और मनोरंजन केबल चैनल इ.एस.पी.एन. ने केबल कार्यक्रमों की शुरुआत की।

13-सन् 1986- विशप डेस्मंड टूटू नोबेल पुरस्कार जीतने के पश्चात 2 वर्ष के लिए केपटाउन के पहले काले आर्च विशप बने।

14- सन् 1997- बेस्ट मिंस्टर आइवी तक राजकुमारी डायना की 4 मील लंबी शवयात्रा निकली जिसका सीधा प्रसारण लाखों लोगों ने टीवी पर देखा।

15- सन् 2009- भारत के पंकज आडवाणी ने विश्व पेशेवर बिलियर्ड्स चैम्पियनशिप जीती ।

आज ही के दिन 1922 में डेविड क्रॉफ्ट ,ब्रिटिश लेखक, निर्माता और अभिनेता का जन्म हुआ।

सन् 1984 - वीरा ज़्वोनारेवा, रूस की टेनिस खिलाडी का जन्म हुआ।

आज ही के दिन इला रमेश भट्ट (जन्म- 7 सितम्बर, 1933, अहमदाबाद) अंतरराष्ट्रीय श्रम, सहकारिता, महिलाओं और लघु-वित्त आंदोलनों की एक सम्मानित नेता हैं, जिन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। वे भारत में 'सेल्फ इम्प्लाएड वुमन एसोसिएशन' (एस.ई.डब्ल्यू.ए.) की संस्थापक हैं, जिसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। यह संस्था लघु ऋण देने, स्वास्थ्य और जीवन बीमा और बच्चों की देखभाल के कामों में संलग्न है। एस.ई.डब्ल्यू.ए. सौ से अधिक सहकारी समितियों की देखरेख में चलती है, जिन्हें महिलाएँ संचालित करती हैं। जनवरी 2010 में एस.ई.डब्ल्यू.ए. की सदस्य संख्या 12 लाख तक पहुँच गई है।

आज ही के दिन योग और तंत्र के प्रकांड विद्वान डॉ. गोपीनाथ कविराज का जन्म 7 सितम्बर 1887 ई. में ढाका के एक गाँव में हुआ था। बचपन में ही माता-पिता का देहांत हो जाने के कारण उनका पालन-पोषण मामा ने किया। उनकी शिक्षा ढाका, कोलकाता, जयपुर और वाराणसी में हुई। सर्वत्र उन्हें छात्रवृत्ति मिलती रही। वाराणसी के क्वींस कॉलेज में संस्कृत में एम.ए. का अध्ययन करते समय उनका आचार्य नरेंद्र देव से परिचय हुआ था। संस्कृत और अंग्रेज़ी के प्रति उनकी रुचि आरम्भ से ही थी। जयपुर के प्रवास काल में उन्होंने वहाँ के समृद्ध पुस्तकालयों का भरपूर लाभ उठाया।
एम. ए. में प्रथम आने पर कविराज को लाहौर और अजमेर में अध्यापक का कार्य मिल रहा था; किंतु उनकी योग्यता से प्रभावित क्वींस कॉलेज के प्राचार्य डॉ. वेनिस ने उन्हें वाराणसी में रोक कर कॉलेज के 'सरस्वती भवन' पुस्तकालय का अध्यक्ष नियुक्त कर लिया। इस पुस्तकालय को वर्तमान समृद्ध रूप प्रदान करने का मुख्य श्रेय कविराज जी को है। 1924 में वे क्वींस कॉलेज के प्रधानाचार्य बनाए गए और 1937 तक इस पद पर रहे।
गोपीनाथ कविराज जी की मुख्य प्रकाशित कृत्तियाँ हैं-

'विशुद्धानंद' (पाँच खंड)
'विशुद्ध नंद वाणी' (सात खंड)
'अखंड महायोग'
'भारतीय संस्कृति की साधना'
'तांत्रिक वाड्मय में शाक्त दृष्टि'
'तांत्रिक साहित्य'
काशी की सारस्वत
सम्मान और पुरस्कार
गोपीनाथ कविराज सेवानिवृत्ति के पश्चात्‌ अपना समय प्राचीन ज्ञान-विज्ञान, अध्यात्म आदि पर  चर्चा और  तांत्रिक साधना में ही बिताते रहे। 1934 में सरकार ने उन्हें 'महामहोपाध्याय' की उपाधि प्रदान की। भारत सरकार ने उन्हें 'पद्म विभूषण' की उपाधि से सम्मानित किया था। इसके अतिरिक्त वे निम्नलिखित सम्मान से भी सम्मानित हो चुके हैं।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय द्वारा डी लिट् (1947)
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 'साहित्य वाचस्पति' (1965)
विश्व भारती द्वारा देशिकोत्तम (1976)
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय द्वारा डी लिट (21 दिसम्बर, 1956)
इस महान कवि गोपीनाथ कविराज का निधन 12 जून, 1976 को वाराणसी में हुआ।

ममूटी - पूरा नाम: 'मुहम्मदकुट्टी इस्माइल पनपराम्बिल', जन्म- 7 सितंबर 1951, केरल) दक्षिण भारतीय सिनेमा के प्रसिद्ध अभिनेता हैं। ममूटी ने सबसे लोकप्रिय मलयाली के एक विश्वव्यापी सर्वेक्षण में मोहनलाल और रेसुल पूकुट्टी को पीछे छोड़ दिया है। एशियन टेलीविजन अवार्डस 2010 द्वारा कराए सर्वेक्षण में सबसे लोकप्रिय मलयाली ममूटी को घोषित किया गया है।

बाबू राम इशारा- जन्म: 7 सितम्बर, 1934,
हिमाचल प्रदेश के ऊना ज़िले में जन्मे लेखक और फ़िल्म निर्देशक बी. आर. इशारा मुम्बई के जुहु इलाके में रहा करते थे। हिमाचल प्रदेश से छोटी उम्र में ही मुंबई आ गए बी. आर. इशारा ने पहले छोटे-मोटे काम किए। शब्दों और विचारों के धनी बी. आर. इशारा ने शुरू में लेखकों की मदद की और बाद में स्वयं लेखक बन गए। उन्होंने हिंदी फ़िल्मों की लीक छोड़ी और नए ढंग के सिनेमा को लेकर आगे बढ़े। कहते हैं उनका मूल नाम रोशन लाल शर्मा था। मुंबई आने पर उन्होंने जहां पहली नौकरी की, उस निर्माता ने उन्हें बाबू नाम दिया। वह उन्हें अपने गुरु के नाम रोशन लाल से नहीं पुकारना चाहता था। बाबू ने पहले अपने नाम में राम जोड़ा। फिर लेखक बने तो अपना तखल्लुस इशारा रख लिया। हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री के राइटर्स एसोशिएसन के सक्रिय सदस्य थे। उन्होंने चेतना की हीरोइन रेहाना सुल्तान से शादी की थी।
इशारा को बोल्ड और समाज के बर्निंग इशूज पर फ़िल्में बनाने के लिए जाना जाता था। उन्होंने हिंदी फ़िल्मों में बोल्ड फ़िल्मों की शुरुआत की थी। ज़रूरत और चेतना जैसी फ़िल्मों से उन्होंने आठवें दशक के आरंभ में हिंदी फ़िल्मों के पारंपरिक दर्शकों को झकझोर दिया था। वे अक्सर नए कलाकारों को लेकर बोल्ड फ़िल्म बनाते थे। उन्होंने सबसे पहले एफटीआईआई से ग्रेजुएट होकर आए कलाकारों पर भरोसा किया और उन्हें अपनी फ़िल्मों में प्रतिभा दिखाने का मौका दिया। उनके द्वारा बनाई गई प्रमुख फ़िल्मों में हम दो हमारे दो, चेतना, चरित्र, औरत जैसी फ़िल्में हैं। उन्होंने प्रसिद्ध क्रिकेटर सलीम दुर्रानी को लेकर ‘चरित्र’ बनाई थी जो बॉक्स ऑफिस पर असफल रही थी। बाबू राम इशारा ने रेहाना सुल्तान, परवीन बॉबी जैसे कलाकारों का पेश करने के साथ अमिताभ बच्चन, जया भादुड़ी, रीना रॉय, अनिल धवन, शत्रुघ्न सिन्हा, रजा मुराद, डैनी, विजय अरोड़ा, राज किरण जैसे कलाकारों के करिअर के आरंभ में बड़े मौके दिए। परवीन बॉबी को सबसे पहले अवसर बी. आर. इशारा ने ही दिया था।
बी. आर. इशारा का निधन 25 जुलाई 2012 को मुम्बई के क्रिटिकेयर अस्पताल में हुआ था।

आज महान स्व्तंत्रता सेनानी की पुण्यतिथि है आइये नमन करते है, और उन सारे के सारे चोर नेताओ को याद भी दिलाते है जिन्होंने हमारे देश की अप्रितम विभूतियो को भुला दिया है।के. एम. चांडी- जन्म- 6 अगस्त, 1921, कोट्टायम ज़िला, केरल; मृत्यु- 7 सितम्बर, 1998) स्वतंत्रता सेनानी तथा गुजरात और मध्य प्रदेश के भूतपूर्व राज्यपाल थे। उन्होंने राजनीति में 17 वर्ष की उम्र से ही हिस्सा लेना शुरू कर दिया था। उस समय वे 12वीं कक्षा के छात्र थे। सन 1946 में जब के. एम. चांडी मीनाचिल तालुक कांग्रेस कमेटी के सचिव थे, तब उन्हें राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया गया, पर वे स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेते ही रहे। के. एम. चांडी ने पलई में 'सेंट थामस कॉलेज' की स्थापना में योगदान दिया था। इस कॉलेज में उन्होंने 1950 में अध्यापन कार्य भी किया। 15 मई, 1982 को के. एम. चांडी पांडिचेरी के उप-राज्यपाल बने। वे 6 अगस्त, 1983 को गुजरात के राज्यपाल बनाये गए। बाद में मध्य प्रदेश के राज्यपाल का पदभार उन्होंने 19 मई, 1984 को ग्रहण किया।
अब आइये वापस प्रेम से बोलते है जय बाबा भोले नाथ।
और नवरात्र का पावन पर्व आने वाला है ये वीडियो जरूर देखे और दूसरे को भी दिखाए।
jalpa maai bhatni.DAT
http://youtu.be/ORq8Dcah5Mk
जय हो बाबा फरसा वाले 👉🚩👈

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