अधूरा इसलिये क्योंकि इस दुनिया मे सब कुछ अधूरा है, ऐसा आज तक कोई नहीं हो सका जो खुद को सम्पूर्ण कह सके! किसी का ज्ञान अधूरा, किसी का ख्वाब अधूरा, किसी की सोच अधूरी तो किसी का शरीर अधूरा, जो दिखा वो सच अधूरा, जो लिखा वो फलसफा अधूरा, ना तू पूरा ना मैं पूरा इसलिये चल लिखें, कुछ लिख तू अधूरा कुछ लिखूं मैं अधूरा!!!!!
धर्म ग्रंथों में स्कंदपुराण को महापुराण कहा जाता है। स्कंदपुराण में धर्म ज्ञान और नीतियों से संबंधित कई बातें बताई गई हैं। पुराण के अनुसार, ऐसी 5 चीजें हैं, जो कि हर मनुष्य के जीवन में होना अनिवार्य माना गया है। इसमें से अगर 1 भी चीज की कमी हो तो उसका जीवन अधूरा माना जाता है।
आइये जरा गौर फरमाते है-
जीवितं च धनं दारा पुत्राः क्षेत्र गृहाणि च।
याति येषां धर्माकृते त भुवि मानवाः।।
मनुष्य जीवन में धन, स्त्री, पुत्र, घर-धर्म के काम ( गृहस्थी संबंधि), और खेत - ये 5 चीजें होती हैं, उसी मनुष्य का जीवन इस धरती पर सफल माना जाता है।
1. धन
मनुष्य जीवन के 4 मुख्य आधार माने गए है, जिन्हें धर्म ग्रंथों में 4 पुरुषार्थ कहा जाता है। चारों पुरुषार्थों में से सबसे पहला पुरुषार्थ अर्थ कहा गया है, अर्थ यानी धन। धन कमाना हर मनुष्य के लिए अनिवार्य माना जाता है। जीवन को सफलता से जीने के लिए हर किसी को धन कमाना जरूरी होता है। बिना धन सुख नहीं मिलता और जीवन भर सिर्फ संघर्ष होता है। इसलिए, धन कमाना इंसान के लिए बहुत जरूरी माना गया है।
2. स्त्री
स्त्री को अर्धांगिनी कहते हैं, क्योंकि स्त्री के बिना हर पुरुष अधूरा माना जाता है। किसी भी पुरुष के जीवन को पूरा करने के लिए उसमें स्त्री का होना जरूरी होता है। मनुष्य जीवन में चाहे कितना ही सफल हो जाए, लेकिन अगर उसके जीवन में पत्नी न हो तो जीवन में कमी रह ही जाती है।
3. संतान
संतान हर किसी के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण अंग मानी जाती है। सुखी और खुशहाल परिवार के लिए परिवार का पूरा होना आवश्यक माना जाता है। बिना संतान के कोई भी परिवार पूरा नहीं हो सकता। जिस दम्पति की संतान नहीं होती, उनके जीवन का एक बहुत बड़ा हिस्सा अधूरा ही रह जाता है। इसलिए हर मनुष्य के जीवन में संतान का होना आवश्यक होता है।
4. गृहस्थी के काम
हर मनुष्य की कुछ जिम्मेदारियां होती हैं, जिन्हें पूरा करना उसका फर्ज है। सभी को अपनी पारिवारिक जिम्मेदारी पूरी करनी ही चाहिए। जो मनुष्य अपने कामों से मुंह मोड़ लेता है या अपनी जिम्मेदारियां पूरी नहीं करता, वह कभी सुखी नहीं रह पाता। ऐसे मनुष्य के परिवार और वैवाहिक जीवन में हमेशा क्लेश बना रहता है। इन सबसे बचने के लिए मनुष्य को अपने सभी गृहस्थी के काम पूरे करना चाहिए।
5. खेत
धर्म-ग्रंथों के अनुसार, खेती करना या मिट्टी से जुड़े रहना भी हर किसी के लिए अनिवार्य बताया गया है। जो मनुष्य खेत-खलिहान के लिए समय निकालता है और वहां काम करता है, उसे सुख और आनंद मिलता है। साथ ही मिट्टी से जुड़े रहने पर स्वास्थय भी ठीक रहता है। इसलिए, हर मनुष्य को अपने जीवन का थोड़ा समय खेतों में भी बिताना चाहिए, इसके बिना जीवन अधूरा माना जाता है।
और अब चलते चलते राणा जी की एक गजल|
सब के कहने से इरादा नहीं बदला जाता
हर सहेली से दुपट्टा नहीं बदला जाता
हम तो शायर हैं सियासत नहीं आती हमको
हम से मुंह देखकर लहजा नहीं बदला जाता
हम फकीरों को फकीरी का नशा रहता हैं
वरना क्या शहर में शजरा* नहीं बदला जाता
ऐसा लगता हैं के वो भूल गया है हमको
अब कभी खिडकी का पर्दा नहीं बदला जाता
जब रुलाया हैं तो हसने पर ना मजबूर करो
रोज बीमार का नुस्खा नहीं बदला जाता
गम से फुर्सत ही कहाँ है के तुझे याद करू
इतनी लाशें हैं तो कान्धा नहीं बदला जाता
उम्र एक तल्ख़ हकीकत हैं दोस्तों फिर भी
जितने तुम बदले हो उतना नहीं बदला जाता
जय हो बाबा फरसा वाले।
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