शुक्रवार, 11 सितंबर 2015

नेताओ में नेता बाला शाहेब

आते जाते न जाने कितने, झेले है इनको बातो को।
नाम है बाला शाहेब ठाकरे कहानी इनकी कहते है।।

मैं सुरसरि मणि इनकी बातो का, आज गाथा गाता हूँ।
मुम्बई का रहने वाला हूँ , मुंबईकर में कहलाता हूँ।।

जिसकी बस एक ऊँगली भर से, थम जाती दुश्मन की छाती थी।
हर्षित थे हम सब सनातनी ,इनकी बाते तो निराली थी।।

आज उन्ही शाहब का बेटा, बेच रहा है मांस को।
जो रामदूत कहलाते थे ,वो कटवा रहा है अपने हाथो को।।

श्री राम चंद्र के दूत के घर में, ये पैदा हुआ कपूत ही है।
इसकी राष्ट्र -धर्म की बातें , केवल कोरा जूठ ही है।।

जिस के बाप से रोया दाऊद, सलेम,याकूब भी भाग गया।
उसके सनातनी पुत्र के मन में, सुवरो से प्यार क्यू जाग गया?

अरे निरहू तेरे बाप ने कहा था,
प्रज्ञा मेरी बेटी है ....
बेटी की माँ, भारत माँ को,रुलाता तू क्यू खोटी है।।

जब जब संकट भगवा पे आया , बूढ़ा शेर दहाड़ा था।
अपनी बोली, और शैली से , भारत माँ को बचाया था।।

आज तूने नाक कटवाया है, फटती होगी छाती इनकी।
क्यू करता है खुदगर्जी पे ,जो काम न इनको जचती थी।।

हमें माफ़ करना हे शाहेब, हम इसे सनातनी नहीं कह सकते है।
जब तक निर्लज्ज को लाज न आये ,हम ऐसे ही लिखते रहते है।।

अगर सुकून चाहते हो उद्धव, तो भगवा को लहरा दो तुम।
मीरा भायंदर की क्या औकात, पूरे भारत में लगोटा बाधो तुम।।
प्रेम से बोलिये जय बाबा भोले नाथ

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