कुछ बात हुई कुछ राज हुई, कोई तो भी न बात बनी।
कब तक लूटोगे देश की हालत जर्रे जर्रे से यही दबी आवाज उठी।।
मत काटो,बाटो इस माता को, जिसने तुमको जन्माया है।
सुरसरि मणि की बातो का अब कर लो ख्याल यही पैगाम आया है।।
नमन करते है आज के सुनहरे अवसर पे लोकनायक जय प्रकाश नारायण जी को। आजादी से पहले और आजादी से बाद के हालातों में जमीन आसमान का अंतर है. जिन लोगों ने देश की पराधीनता के दिनों को देखा और फिर देश की आजादी के बाद के हालातों को देखा उनके लिए यह तय कर पाना बहुत मुश्किल है कि कौन सा समय बेहतर था? कुछ ऐसे ही लोगों में से एक रहे भारत रत्न जय प्रकाश नारायण.
जयप्रकाश नारायण उस सिताब दियारा में भी नहीं हैं जहां पैदा हुए और उस राजनीति के केंद्र में भी नहीं है जिसे बदलने का एक ज़ोरदार प्रयास किया है। जेपी अचानक किसी पुराने ब्रांड की तरह हमारी राजनीति में पुनर्जीवित होकर उभरते रहते हैं और ग़ायब हो जाते हैं। रामलीला मैदान की सभाएं उनका नाम लेकर किसी क्रांति का आग़ाज़ करने लगती हैं और ल्युटियन दिल्ली की ढलानों पर पहुंच कर सत्ता की बात करने लगती हैं। क्या जेपी को याद करना इतना आसान है?
रवीश कुमार
कई दशक बीत जाने के बाद जेपी को अब एक मूर्ति के रूप में ही याद किया जा सकता है। पर लोकतंत्र के लिए सुखद है कि जेपी का नाम किसी न किसी बहाने लौटता रहे। जेपी को याद करने का मतलब है लोकतंत्र के सवालों को याद करना। नाकामियों को याद करने से सकारात्मकता आती है। सिर्फ सकारात्मकता की चासनी पंसद करने वाले वो धूर्त लोग होते हैं जो इसके नाम पर जीवन की सच्चाइयों को खत्म कर देना चाहते हैं। बी पॉजिटिव। लोकतंत्र का सबसे बड़ा ठगैत नारा है। जब से होश संभाला है, जेपी को हर बहस में जिंदा पाया। वो उस आत्मा की तरह थे जो हर बहस में भूत का रूप धर कर टपक आते थे।
"भ्रष्टाचार मिटाना, बेरोजगारी दूर करना, शिक्षा में क्रान्ति लाना, आदि ऐसी चीजें हैं जो आज की व्यवस्था से पूरी नहीं हो सकतीं; क्योंकि वे इस व्यवस्था की ही उपज हैं। वे तभी पूरी हो सकती हैं जब सम्पूर्ण व्यवस्था बदल दी जाए। और, सम्पूर्ण व्यवस्था के परिवर्तन के लिए क्रान्ति, ’सम्पूर्ण क्रान्ति’ आवश्यक है।"
सम्पूर्ण क्रान्ति के आह्वान उन्होने श्रीमती इंदिरा गांधी की सत्ता को उखाड़ फेकने के लिये किया था।
लोकनायक नें कहा कि सम्पूर्ण क्रांति में सात क्रांतियाँ शामिल है - राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक, शैक्षणिक व आध्यात्मिक क्रांति। इन सातों क्रांतियों को मिलाकर सम्पूर्ण क्रान्ति होती है।
अब एक झलक जय नारायण जी के बारे में।
जयप्रकाश नारायण जी का जन्म (11 अक्टूबर,1902 को हुआ था, और उनका देहवासन 8 अक्टूबर, 1979) को हुआ (संक्षेप में जेपी)भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता थे। उन्हें 1970 में इंदिरा गांधी के विरुद्ध विपक्ष का नेतृत्व करने के लिए जाना जाता है। इन्दिरा गांधी को पदच्युत करने के लिये उन्होने 'सम्पूर्ण क्रांति' नामक आन्दोलन चलाया। वे समाज-सेवक थे, जिन्हें 'लोकनायक' के नाम से भी जाना जाता है। 1999 में उन्हें मरणोपरान्त भारत रत्न से सम्मनित किया गया। इसके अतिरिक्त उन्हें समाजसेवा के लिये 1965 में मैगससे पुरस्कार भी प्रदान किया गया था। पटना के हवाई अड्डे का नाम उनके नाम पर रखा गया है। दिल्ली सरकार का सबसे बड़ा अस्पताल 'लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल' भी उनके नाम पर है।
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