शनिवार, 5 सितंबर 2015

5 सितम्बर का इतिहास

एक बार राधाजी ने कृष्णजी से पूछा: मैं कहाँ हूँ..?
कृष्ण ने कहा: तुम मेरे दिल में.. साँस में.. जिगर में.. धड़कन में.. तन में.. मन में.. हर जगह हो..!
फिर राधाजी ने पूछा: मैं कहाँ नहीं हूँ..?
तो कृष्ण ने कहा: मेरी किस्मत में..!
बहुत बहुत बधैया आप सभी महानुभावो को कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पे।
इस वर्ष शिक्षक दिवस 5 सितम्बर शनिवार को भाद्रपद कृष्णपक्ष अष्टमी को महाजन्माष्टमी पूरे देश में मनाई जाएगी। ऐसे तीन योग हैं, जो कई वर्षो बाद बने हैं। 26 वर्षों बाद जन्माष्टमी बृहस्पति, सूर्य सिंह संक्रांति में आयी है 20 वर्षों बाद स्मार्त एवं वैष्णवों दोनों संप्रदाय की जन्माष्टमी साथ में आयी है। 2 वर्षों बाद अष्टमी, रोहिणी नक्षत्र में पूरे दिन रहेगी और ऐसा अगला महायोग 8 साल बाद 6/9/2023 में बनेगा।

जन्माष्टमी के लिए धर्मसिन्धु के अनुसार जो आवश्यक योग माने गये हैं, उनमें प्रमुख रूप से अष्टमी तिथि जो रात्रि 3:10 बजे तक रहेगी, रोहिणी नक्षत्र रात्रि 12:10 बजे तक रहेगा। मध्यरात्रि 12 बजे पूजन का सबसे अच्छा मुहूर्त है। यह जन्माष्टमी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अष्टमी तिथि एवं रोहिणी नक्षत्र, उच्च वृषभ राशि में चन्द्र, सिंह का सूर्य, कन्या का बुध अमृत सिद्दी तथा सर्वार्थ सिद्दी योग में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। इसबार वही योग बन रहा है। इस कारण बृहस्पति उदय तथा शुक्र मार्गी होने जा रहे हैं।
जन्माष्टमी को तंत्र की 4 महारात्रियों मे से एक माना गया है। इस रात्रि में अष्टमी तथा रोहिणी नक्षत्र का आना अति शुभ माना जाता है। इस बार यह महारात्रि भी इन्ही योगों में होने के कारण अति शुभ एवं सिद्दी दायक होगी। ऐसे योगों में विशेष रूप से शनि, राहु, केतु, भूत, प्रेत, वशीकरण, सम्मोहन, भक्ति और प्रेम के प्रयोग एवं उपाय करने से विशेष फल की प्राप्ति होगी।

अब आते है गुरूजी दिवस पे । डॉ. राधाकृष्णन अपनी बुद्धिमतापूर्ण व्याख्याओं, आनंददायी अभिव्यक्ति और हंसाने, गुदगुदाने वाली कहानियों से अपने छात्रों को मंत्रमुग्ध कर दिया करते थे। वे छात्रों को प्रेरित करते थे कि वे उच्च नैतिक मूल्यों को अपने आचरण में उतारें। वे जिस विषय को पढ़ाते थे, पढ़ाने के पहले स्वयं उसका अच्छा अध्ययन करते थे। दर्शन जैसे गंभीर विषय को भी वे अपनी शैली की नवीनता से सरल और रोचक बना देते थे।
पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती प्रतिवर्ष 5 सितंबर को 'शिक्षक दिवस' के रूप में मनाई जाती है। इन दिनों जब शिक्षा की गुणात्मकता का ह्रास होता जा रहा है और गुरु-शिष्य संबंधों की पवित्रता को ग्रहण लगता जा रहा है, उनका पुण्य स्मरण फिर एक नई चेतना पैदा कर सकता है। जब वे राष्ट्रपति बने थे, तब कुछ शिष्य और प्रशंसक उनके पास गए थे। उन्होंने उनसे निवेदन किया था कि वे उनके जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा, 'मेरे जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने से निश्चय ही मैं अपने को गौरवान्वित अनुभव करूँगा।' तब से 5 सितंबर सारे देश में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जा रहा है।
शिक्षा के क्षेत्र में डॉ. राधाकृष्णन ने जो अमूल्य योगदान दिया वह निश्चय ही अविस्मरणीय रहेगा। वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। यद्यपि वे एक जाने-माने विद्वान, शिक्षक, वक्ता, प्रशासक, राजनयिक, देशभक्त और शिक्षा शास्त्री थे, तथापि अपने जीवन के उत्तरार्द्ध में अनेक उच्च पदों पर कामकरते हुए भी शिक्षा के क्षेत्र में सतत योगदान करते रहे। उनकी मान्यता थी कि यदि सही तरीके से शिक्षा दी जाए तो समाज की अनेक बुराइयों को मिटाया जा सकता है।

समाज की नजरो में जितने शिक्षक रूपी मनुष्य है मैं गंगा मणि दीक्षित उन सभी गुरूजी लोगो को प्रणाम करता हूँ जिन्होंने मुझे मेरे जीवन के किसी भी क्षणों में कुछ न कुछ सिखने को दिया और सिखाया।

आदर्शों की मिसाल बनकर
बाल जीवन संवारता शिक्षक,
सदाबहार फूल-सा खिलकर
महकता और महकाता शिक्षक,
नित नए प्रेरक आयाम लेकर
हर पल भव्य बनाता शिक्षक,
संचित ज्ञान का धन हमें देकर
खुशियां खूब मनाता शिक्षक,
पाप व लालच से डरने की
धर्मीय सीख सिखाता शिक्षक,
देश के लिए मर मिटने की
बलिदानी राह दिखाता शिक्षक,
प्रकाशपुंज का आधार बनकर
कर्तव्य अपना निभाता शिक्षक,
प्रेम सरिता की बनकर धारा
नैया पार लगाता शिक्षक।

अब आइये एक नजर में देखते है आज का इतिहास क्या है।

सन् 1887 चीन में हवांग हू नदी का तूफ़ान आरंभ हुआ। इस तूफ़ान से भारी बाढ़ आयी जो एक महीने तक जारी रहीं इस विनाशकारी बाढ़ ने लगभग ९ लाख लोगों की जान ले ली। कई शहर और सैकड़ों गांव बह गये। तथा कृषि नष्ट हो गयी। इस नदी की लम्बाई ५ हज़ार दो सौ किलोमिटर है। यह पूर्वी चीन में बहती है।

सन् 1888 डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन, भारत के प्रथम उप-राष्ट्रपति (सन् 1952- सन् 1962) और द्वितीय राष्ट्रपति रहे। उनका जन्म दक्षिण भारत के तिरुत्तनि स्थान मे हुआ था जो चेन्नई से 64 किमी उत्तर-पूर्व मे है। उनका जन्मदिन (5 सितम्बर) भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है ।
निधन– 17 अप्रैल, सन् 1975

सन् 1993 को पराकाश में इस्लामी जगत की एक भव्य मस्जिद का उदघाटन हुआ। यह आधुनिक और प्राचीन निर्माण शैली के मिश्रण का नमूना है। इसमें कुल मिलाकर एक साथ १ लाख लोग नमाज़ पढ़ सकते हैं। बड़ी ही सुंदर चूनाकारी से नमाज़ ख़ाने को सजाया गया है। इसी प्रकार मस्जिद से मिलाकर एक धार्मिक स्कूल और पुस्तकालय बनाया गया है।

सन् 1939 को अमरीका के तत्कालीन राष्ट्रपति फ़्रेकलिन रोज़वेल्ट ने योरोप में आरंभ हो वाले द्वितीय विश्व युद्ध में अमरीका की निष्पक्षता की घोषणा की।
सन् 1997 को मदर टेरेसा का भारत के कोलकाता नगर में निधन हुआ। उनका मौत का कारण हृदय की गति का रुक जाना था। उन्होंने अपना पूरा जीवन दीन दुखिया की सेवा में अर्पित कर दिया था ।

अब आज का सबसे नवीनतम कार्य जो आज के बाद इतिहास में जुड़ जायेगा।
मोदी सरकार ने वन रैंक वन पेंशन की घोषणा कर दी है। सरकार के इस फैसले से करीब 24 लाख सैनिकों को फायदा मिलेगा। सैनिकों की पेंशन पर सरकार का 75 हजार करोड़ रुपये का खर्च आएगा।

पिछले कई दिनों से पूर्व सैनिक जंतर-मंतर पर वन रैंक वन पेंशन की मांग पर प्रदर्शन कर रहे हैं। आइए आपको बताते हैं वन रैंक वन पेशन का पूरा इतिहास और दुनिया के अन्य देशों के सैनिकों का कैसा है वेतनमान?

क्या है वन रैंक वन पेंशन का इतिहास ?

1973 तक सेना में वन रैंक वन पेंशन थी। उन्हें आम लोगों से ज्यादा वेतन मिलता था।

1973 में आए तीसरे वेतन आयोग ने सशस्त्र बलों का वेतन आम लोगों के बराबर कर दिया।

सितंबर 2009 में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को वन रैंक वन पेंशन पर आगे बढ़ने का आदेश दिया।

-मई 2010 में सेना पर बनी स्थाई समिति ने वन रैंक वन पेंशन लागू करने की सिफारिश की।

-सितंबर 2013 – बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने प्रचार के दौरान वन रैंक वन पेंशन लागू करने का वादा किया।

फरवरी 2014 – यूपीए सरकार ने इसे लागू करने का फैसला किया और 500 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया।

जुलाई 2014 – मोदी सरकार ने बजट में वन रैंक वन पेंशन का मुद्दा उठाया और इसके लिए अलग से 1000 करोड़ रुपए रखने की बात की।

फरवरी 2015 – सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को तीन महीने के अंदर वन रैंक वन पेंशन लागू करने को कहा।
खैर आज का दिन महत्व्पूर्ण इसके लिए बन गया क्यू की इतिहास में ये घटना भी जुड़ गई।
प्रेम से बोलिये जय बाबा मोदक वाले।

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