शुक्रवार, 11 मार्च 2016

11 मार्च का इतिहास

आज का इतिहास सच में सिर्फ महाराष्ट्र में रहने वाले मराठो के बीच में ही सिमित रह गया, ऐसा मुझे इअलिये कहना पड़ा की मराठो को छोड़ कर बाकी लोगो ये भी नहीं मालूम की धर्मवीर छत्रपति संभाजी राजे कौन थे।
(धर्मवीर छत्रपति संभाजी राजे भोसले) या शम्भाजी (1657-1689) मराठा सम्राट और छत्रपति शिवाजी के उत्तराधिकारी। उस समय मराठाओं के सबसे प्रबल शत्रु मुगल बादशाह औरंगजेब बीजापुर और गोलकुण्डा का शासन हिन्दुस्तान से समाप्त करने में उनकी प्रमुख भूमिका रही।

सम्भाजी अपनी शौर्यता के लिये काफी प्रसिद्ध थे। सम्भाजी ने अपने कम समय के शासन काल मे १२० युद्ध किये और इसमे एक प्रमुख बात ये थी कि उनकी सेना एक भी युद्ध मे पराभूत नहीं हुई। इस तरह का पराक्रम करने वाले वह शायद एकमात्र योद्धा होंगे। उनके पराक्रम की वजह से परेशान हो कर दिल्ली के बादशाह औरंगजेब ने कसम खायी थी के जब तक छत्रपती संभाजी पकडे नहीं जायेंगे, वो अपना किमोंश सर पर नहीं चढ़ाएगा।

इनको मुसलमान बनाने के लिए औरंगजेब ने कई कोशिशें की। किन्तु धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज और कवि कलश ने धर्म परिवर्तन से इनकार कर दिया। औरंगजेब ने दोनों की जुबान कटवा दी, आँखें निकाल दी किन्तु शेर छत्रपति शिवाजी महाराज के इस सुपुत्र ने अंत तक धर्म का साथ नहीं छोड़ा। उस समय 11 मार्च 1689 को हिन्दू नववर्ष का दिन था जब औरंगजेब ने  दोनों के शरीर के टुकडे कर के हत्या कर दी। किन्तु ऐसा कहते है की हत्या पूर्व औरंगजेब ने छत्रपति संभाजी महाराज से कहा के मेरे 4 पुत्रों में से एक भी तुम्हारे जैसा होता तो सारा हिन्दुस्थान कब का मुग़ल सल्तनत में समाया होता। जब छत्रपति संभाजी महाराज के टुकडे तुलापुर की नदी में फेंकें गए तो उस किनारे रहने वाले लोगों ने वो इकठ्ठा कर के सिला के जोड़ दिए (इन लोगों को आज " शिवले " इस नाम से जाना जाता है) जिस के उपरांत उनका विधिपूर्वक अंत्यसंस्कार किया। औरंगजेब ने सोचा था की मराठी साम्राज्य छत्रपति संभाजी महाराज के मृत्यु पश्चात ख़त्म हो जाएगा। छत्रपति संभाजी महाराज के हत्या की वजह से सारे मराठा एक साथ आकर लड़ने लगे। अत: औरंगजेब को दक्खन में ही प्राणत्याग करना पड़ा। उसका दक्खन जीतने का सपना इसी भूमि में दफन हो गया।

खैर आइये आज का इतिहास देखते है। और बाबा फरसा वाले का नाम लेकर जयकारा लगाते है।
🚩जय बाबा मोदक वाले🚩

1399 – दिल्ली सहित उत्तर भारत में मारकाट मचाने के बाद तैमूर लंग ने सिन्धु नदी पार की।

1669 – इटली में एटना ज्वालामुखी फटने से 15 हजार लोगों की मौत।

1881 – रामनाथ टैगोर की प्रतिमा कोलकाता के टाउन हॉल में स्थापित की गई। वह पहले भारतीय हैं जिनकी प्रतिमा टाउन हॉल में लगाई गई।

1895 – स्पेन के जहाज रीना रीगोंटा के जिब्राल्टर में डूबने से 400 यात्रियों की मौत।

1917 – ब्रिटिश फौजो ने बगदाद पर कब्जा किया।

1918 – मास्को रूस की राजधानी बनी।

1935 – बैंक कनाडा का गठन किया गया।

1948 – देश के पहले आधुनिक पोत जल उषा का विशाखापट्टनम में जलावतरण हुआ।

1963 – सोमालिया ने ब्रिटेन के साथ राजनयिक संबंध तोड़े।

1978 – इजरायली शहर तेल अवीव में आतंकवादी हमले में 45 लोगों की मौत हुई।

1981 – चिली में संविधान लागू हुआ, राष्ट्रपति अॉगस्तो पिनोशे का दूसरा कार्यकाल शुरु।

1985 – सोवियक संघ के पहले और अंतिम राष्ट्रपति मिखाएल गोर्बाचेव सोवियत संघ के सर्वोच्च नेता बने।

1990 – लिथुआनिया ने स्वतंत्रता की घोषणा की।

1996 – सैटेनिक वर्सेज के लेखक सलमान रुश्दी के ख़िलाफ़ फ़तवा को ईरान ने वापस लिया।

1999 – इंफोसिस कंपनी पहली भारतीय कंपनी है जो नशदाक (NASDAQ) अंतरराष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज की सूची में आई।

2001 – पुलेला गोपीचंद बैडमिंटल में विश्व चैंपियन बने।

2004 – स्पेन में तीन रेलवे स्टेशनों पर हुए बम विस्फोटों में 190 मरे, 1200 घायल।

2006 – यूनानी संसद ने दाह-संस्कार को अनुमति देने वाले क़ानून को बहुमत से पारित किया।

2007 – सुनिता ने कोलकाता से वाघा तक के 2,012 किमी के सफर को रिवर्स गियर में गाड़ी चलाकर पूरा किया।

2008 – पाकिस्तान के लाहौर में दो आत्मघाती विस्फोटों में 26 लोग मारे गये।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के यान एंडेवर ने अंतरिक्ष स्टेशन की ओर उड़ान भरी।

2011 – तोहोकू के नज़दीक भूकंप से जापान में सुनामी और फुकुशिमा परमाणु संयंत्र हादसा हुआ।

आज जिन महानुभाओं का जन्मदिन है आइये देखते है एक झलक में।

1915- विजय हजारे का जन्मदिन

1925 - मदनसिंह मतवाले - हैदराबाद रियासत के साथ संघर्ष करने वाले प्रमुख व्यक्तियों में से एक।

आज कइ दिन जिन व्यक्तियो ने अपना जीवन धरती माँ की गोद में रख दिया, आइये इक नजर उनके ऊपर भी डॉल लेते है।

1689- औरंगजेब ने आज हई के डीईन संभाजी की हत्या की।

1980 - चन्द्रभानु गुप्त - प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और उत्तर प्रदेश के भूतपूर्व मुख्यमंत्री।
अब इसी के साथ विदा लेते हुए शुभ रात्रि और
जय हो बाबा भोले नाथ

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